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Archive for August, 2008

खाक वो ख्वाब हो गए होंगे
फिर परेशां जनाब हो गए होंगे।
उनके होठों पे तो कलियां होती थी
अब तो हंसी में भी गुलाब हो गए होंगे।
तसव्वुर, दीवानगी, अश्क- औ- जज्बात
जवां वो शबाब हो गए होंगे।
मैं भी आया था उनकी महफिल में
सुनके वो बेनकाब हो गए होंगे।
होता कैसे दर्दे दिल कम “शीलू”
साकी भी अब खुद शराब हो [...]

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तेरी यादों को समेटकर रखें भी तो कहां
दामन तो पहले ही शिकवों से भरा है।

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एक ही सफर में
थक कर रुका हूं
पूरे तेंतीस पडावों पर…..।
उतावलेपन में
कहीं भी
ठहर कर नहीं देखा
कि कहां क्या है…..।
बस यूं ही
कहीं कहीं का
याद है कुछ कुछ….।
शायद वह पांचवा पडाव था…..
पापा ने
पडोस के लडके को
पीटने की सजा दी थी
और फिर
गले भी लगाया था,
समझाया था…।
तेरहवें पडाव पर
वह सुमन और……..

अठाइसवां पडाव था वह शायद…….
जब रितु ने
स्कूल जाने से मना [...]

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