खाक वो ख्वाब हो गए होंगे
फिर परेशां जनाब हो गए होंगे।
उनके होठों पे तो कलियां होती थी
अब तो हंसी में भी गुलाब हो गए होंगे।
तसव्वुर, दीवानगी, अश्क- औ- जज्बात
जवां वो शबाब हो गए होंगे।
मैं भी आया था उनकी महफिल में
सुनके वो बेनकाब हो गए होंगे।
होता कैसे दर्दे दिल कम “शीलू”
साकी भी अब खुद शराब हो [...]
Archive for August, 2008
साकी भी अब खुद शराब हो गए होंगे
Posted in याद, tagged ख्वाब, गुलाब, जज्बात, तसव्वुर, दीवानगी, महफिल, शराब, साकी, होठ on August 21, 2008 | 1 Comment »
Posted in याद, tagged दामन, याद, शिकवा, dard, gazal, hindi, kavita, poetry, sher on August 20, 2008 | Leave a Comment »
तेरी यादों को समेटकर रखें भी तो कहां
दामन तो पहले ही शिकवों से भरा है।
एक ही सफर में…
Posted in याद, सफर, tagged पडाव, याद, सफर on August 15, 2008 | 4 Comments »
एक ही सफर में
थक कर रुका हूं
पूरे तेंतीस पडावों पर…..।
उतावलेपन में
कहीं भी
ठहर कर नहीं देखा
कि कहां क्या है…..।
बस यूं ही
कहीं कहीं का
याद है कुछ कुछ….।
शायद वह पांचवा पडाव था…..
पापा ने
पडोस के लडके को
पीटने की सजा दी थी
और फिर
गले भी लगाया था,
समझाया था…।
तेरहवें पडाव पर
वह सुमन और……..
अठाइसवां पडाव था वह शायद…….
जब रितु ने
स्कूल जाने से मना [...]
