एक ही सफर में
थक कर रुका हूं
पूरे तेंतीस पडावों पर…..।
उतावलेपन में
कहीं भी
ठहर कर नहीं देखा
कि कहां क्या है…..।
बस यूं ही
कहीं कहीं का
याद है कुछ कुछ….।
शायद वह पांचवा पडाव था…..
पापा ने
पडोस के लडके को
पीटने की सजा दी थी
और फिर
गले भी लगाया था,
समझाया था…।
तेरहवें पडाव पर
वह सुमन और……..

अठाइसवां पडाव था वह शायद…….
जब रितु ने
स्कूल जाने से मना किया था
और सजा में
उसे रहना पडा था भूखा।
यही हाल है बस कहीं कहीं का
याद है कुछ कुछ.
क्योंकि
एक ही सफर में
थक कर रुका हूं
पूरे तेंतीस पडावों पर…..।

बहुत अच्छा लिखा है। स्वागत है आपका।
सादर अभिवादन
पहले तो हिन्दी ब्लोग्स के नए साथियों में आपका सहृदय स्वागत है
दूसरे आपकी सशक्त रचना के लिए आपको बहुत बधाई
चलिए आज मैंने अपने ब्लॉग पे एक गीत डाला है
परिचय के लिए उसकी कुछ पंक्तियाँ देखिये
और कुछ है भी नहीं देना हमारे हाथ में
दे रहे हैं हम तुम्हें ये “हौसला ” सौगात में
हौसला है ये इसे तुम उम्र भर खोना नहीं
है तुम्हें सौगंध आगे से कभी रोना नहीं
मत समझना तुम इसे तौहफा कोई नाचीज है
रात को जो दिन बना दे हौसला वो चीज है
जब अकेलापन सताए ,यार है ये हौसला
जिंदगी की जंग का हथियार है ये हौसला
हौसला ही तो जिताता ,हारते इंसान को
हौसला ही रोकता है दर्द के तूफ़ान को
हौसले से ही लहर पर वार करती कश्तियाँ
हौसले से ही समंदर पार करती कश्तियाँ
हौसले से भर सकोगे जिंदगी में रंग फ़िर
हौसले से जीत लोगे जिंदगी की जंग फ़िर
तुम कभी मायूस मत होना किसी हालात् में
हम चलेंगे ‘ आखिरी दम तक ‘ तुम्हारे साथ में
आपकी सक्रीय प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा में
डॉ उदय ‘मणि’
http://mainsamayhun.blogspot.com
Bahut Khoob… Vakai aap bahut achcha likhate… pad kar kafi achcha laga… mai ek rachnakar to nahi… phir mujhe prateet hota hai ki thodi zarurat hai apani rachna ko takat dene ki… shabdo ko majbooti ke sath prayog me laye… aap svam mahsoos karenge kis kadar tez aa gaya hai
aage aapse ummeende badthi hai
नए चिट्टे की बहुत बहुत बधाई, निरंतर सक्रिय लेखन से हिन्दी चिट्टा जगत को समृद्ध करें
आपका मित्र
सजीव सारथी