Posted in याद, tagged इल्म, गम, चाहत, जुस्तजू, दीदार, दुआ, फसाना, सितम on September 17, 2008 | 1 Comment »
हम अपने आप से कुछ यूं बदला लेते हैं
हमपे सितम करने वाले को भी दुआ देते हैं।
यूं तो हमें हंसने का भी नहीं है इल्म
उनसे भले गम भी मिले तो मुस्करा लेते हैं।
चोरी छिपे करते है उनका दीदार औ जुस्तजू
सामना हो जाए तो फिर नजरें झुका लेते हैं।
एक झूठी आस है दिल को समझाने की [...]
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Posted in याद, tagged जहर, जालिम, वफा, वादे, शिकवा on September 17, 2008 | Leave a Comment »
ए जालिम वफा न सही बेवफाई तो निभा
पिला दे जहर मगर प्यार से पिला।
साथ ताउम्र न दो तो कोइ शिकवा नहीं
पर जो वादे किये थे वो तो निभा।
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