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Archive for September, 2008

हम अपने आप से कुछ यूं बदला लेते हैं
हमपे सितम करने वाले को भी दुआ देते हैं।
यूं तो हमें हंसने का भी नहीं है इल्म
उनसे भले गम भी मिले तो मुस्करा लेते हैं।
चोरी छिपे करते है उनका दीदार औ जुस्तजू
सामना हो जाए तो फिर नजरें झुका लेते हैं।

एक झूठी आस है दिल को समझाने की [...]

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ए जालिम वफा न सही बेवफाई तो निभा
पिला दे जहर मगर प्यार से पिला।
साथ ताउम्र न दो तो कोइ शिकवा नहीं
पर जो वादे किये थे वो तो निभा।

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