हम अपने आप से कुछ यूं बदला लेते हैं
हमपे सितम करने वाले को भी दुआ देते हैं।
यूं तो हमें हंसने का भी नहीं है इल्म
उनसे भले गम भी मिले तो मुस्करा लेते हैं।
चोरी छिपे करते है उनका दीदार औ जुस्तजू
सामना हो जाए तो फिर नजरें झुका लेते हैं।

एक झूठी आस है दिल को समझाने की दोस्तो
फिर भी चाहत से बचने का मश्विरा देते हैं।
फसाना ही निराला है हमारी गमे जिन्दगी का
जब सुनाते है कांटो को भी रुला देते हैं।

फसाना ही निराला है हमारी गमे जिन्दगी का
जब सुनाते है कांटो को भी रुला देते हैं।
bahut aache………