Posted in याद, tagged इल्म, गम, चाहत, जुस्तजू, दीदार, दुआ, फसाना, सितम on September 17, 2008 | 1 Comment »
हम अपने आप से कुछ यूं बदला लेते हैं
हमपे सितम करने वाले को भी दुआ देते हैं।
यूं तो हमें हंसने का भी नहीं है इल्म
उनसे भले गम भी मिले तो मुस्करा लेते हैं।
चोरी छिपे करते है उनका दीदार औ जुस्तजू
सामना हो जाए तो फिर नजरें झुका लेते हैं।
एक झूठी आस है दिल को समझाने की [...]
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Posted in याद, tagged जहर, जालिम, वफा, वादे, शिकवा on September 17, 2008 | Leave a Comment »
ए जालिम वफा न सही बेवफाई तो निभा
पिला दे जहर मगर प्यार से पिला।
साथ ताउम्र न दो तो कोइ शिकवा नहीं
पर जो वादे किये थे वो तो निभा।
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Posted in याद, tagged ख्वाब, गुलाब, जज्बात, तसव्वुर, दीवानगी, महफिल, शराब, साकी, होठ on August 21, 2008 | 1 Comment »
खाक वो ख्वाब हो गए होंगे
फिर परेशां जनाब हो गए होंगे।
उनके होठों पे तो कलियां होती थी
अब तो हंसी में भी गुलाब हो गए होंगे।
तसव्वुर, दीवानगी, अश्क- औ- जज्बात
जवां वो शबाब हो गए होंगे।
मैं भी आया था उनकी महफिल में
सुनके वो बेनकाब हो गए होंगे।
होता कैसे दर्दे दिल कम “शीलू”
साकी भी अब खुद शराब हो [...]
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Posted in याद, tagged दामन, याद, शिकवा, dard, gazal, hindi, kavita, poetry, sher on August 20, 2008 | Leave a Comment »
तेरी यादों को समेटकर रखें भी तो कहां
दामन तो पहले ही शिकवों से भरा है।
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Posted in याद, सफर, tagged पडाव, याद, सफर on August 15, 2008 | 4 Comments »
एक ही सफर में
थक कर रुका हूं
पूरे तेंतीस पडावों पर…..।
उतावलेपन में
कहीं भी
ठहर कर नहीं देखा
कि कहां क्या है…..।
बस यूं ही
कहीं कहीं का
याद है कुछ कुछ….।
शायद वह पांचवा पडाव था…..
पापा ने
पडोस के लडके को
पीटने की सजा दी थी
और फिर
गले भी लगाया था,
समझाया था…।
तेरहवें पडाव पर
वह सुमन और……..
अठाइसवां पडाव था वह शायद…….
जब रितु ने
स्कूल जाने से मना [...]
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