तेरी यादों को समेटकर रखें भी तो कहां
दामन तो पहले ही शिकवों से भरा है।
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Posted in याद, tagged दामन, याद, शिकवा, dard, gazal, hindi, kavita, poetry, sher on August 20, 2008 | Leave a Comment »
एक ही सफर में…
Posted in याद, सफर, tagged पडाव, याद, सफर on August 15, 2008 | 4 Comments »
एक ही सफर में
थक कर रुका हूं
पूरे तेंतीस पडावों पर…..।
उतावलेपन में
कहीं भी
ठहर कर नहीं देखा
कि कहां क्या है…..।
बस यूं ही
कहीं कहीं का
याद है कुछ कुछ….।
शायद वह पांचवा पडाव था…..
पापा ने
पडोस के लडके को
पीटने की सजा दी थी
और फिर
गले भी लगाया था,
समझाया था…।
तेरहवें पडाव पर
वह सुमन और……..
अठाइसवां पडाव था वह शायद…….
जब रितु ने
स्कूल जाने से मना [...]
