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Posts Tagged ‘साकी’

खाक वो ख्वाब हो गए होंगे
फिर परेशां जनाब हो गए होंगे।
उनके होठों पे तो कलियां होती थी
अब तो हंसी में भी गुलाब हो गए होंगे।
तसव्वुर, दीवानगी, अश्क- औ- जज्बात
जवां वो शबाब हो गए होंगे।
मैं भी आया था उनकी महफिल में
सुनके वो बेनकाब हो गए होंगे।
होता कैसे दर्दे दिल कम “शीलू”
साकी भी अब खुद शराब हो [...]

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